

हृदय रोगों के इलाज में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव आए हैं। पहले यह माना जाता था कि एंजियोप्लास्टी का मतलब ही स्टेंट लगाना है, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान ने एक नई दिशा दी है। ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी ने यह साबित किया है कि हर मरीज में स्टेंट लगाना जरूरी नहीं होता। सही परिस्थितियों में बिना स्टेंट के भी ब्लॉकेज का सफल और सुरक्षित उपचार किया जा सकता है।

भारत में हृदय रोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण एंजियोप्लास्टी की जरूरत भी बढ़ी है। आमतौर पर मरीज और उनके परिजन यही सोचते हैं कि ब्लॉकेज मिलने पर स्टेंट ही एकमात्र समाधान है। लेकिन अब ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी जैसी आधुनिक तकनीक ने इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है।
यह समझना बहुत जरूरी है कि आज भी कई बड़े और जटिल ब्लॉकेज में स्टेंट जीवनरक्षक और अनिवार्य होता है। परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है। कौन-सी तकनीक किस मरीज के लिए उपयुक्त रहेगी, इसका निर्णय केवल अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट ही कर सकते हैं।

ड्रग एल्यूटिंग बैलून (DEB) एक विशेष प्रकार का बलून होता है, जिस पर दवा की कोटिंग की जाती है। जब इस बलून को ब्लॉकेज वाली धमनी में लगभग 30 सेकंड या उससे अधिक समय तक फुलाया जाता है, तो दवा सीधे धमनी की भीतरी परत में पहुंच जाती है। यह दवा सूजन को कम करती है और दोबारा संकुचन (रेस्टेनोसिस) की संभावना घटाती है।
ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शरीर के अंदर कोई स्थायी धातु (स्टेंट) नहीं छोड़ा जाता। इसलिए इसे “मेटल-लेस एंजियोप्लास्टी” भी कहा जाता है। जिन मरीजों में लंबे समय तक ब्लड थिनर दवाएं लेना जोखिम भरा हो सकता है, उनके लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत अध्ययनों में भी इस तकनीक के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। TCT 2025 (Transcatheter Cardiovascular Therapeutics) में सायरोलिमस-कोटेड DEB पर आधारित बड़े अध्ययनों के नतीजे साझा किए गए। DeNovo ट्रायल में 3,300 से अधिक मरीजों का अध्ययन किया गया, जिसमें 12 महीनों बाद पाया गया कि सायरोलिमस-कोटेड DEB के परिणाम ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (DES) के समान (Non-inferior) रहे। टारगेट वेसल फेल्योर की दर लगभग बराबर थी।
इसी प्रकार ISR ट्रायल, जिसमें पहले से लगे स्टेंट के अंदर दोबारा ब्लॉकेज वाले मरीज शामिल थे, में भी ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी ने सुरक्षा और प्रभावशीलता के अच्छे परिणाम दिखाए। इन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि यह तकनीक अब केवल स्टेंट रेस्टेनोसिस तक सीमित नहीं है, बल्कि नए ब्लॉकेज में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

हर मरीज की धमनियां अलग होती हैं। इलाज का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं है। 20 वर्षों के अनुभव और 8,000 से अधिक एंजियोप्लास्टी के आधार पर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सिद्धांत जैन का कहना है कि कभी स्टेंट जीवनरक्षक होता है, तो कभी ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी उतना ही सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित होता है।
सही निर्णय मरीज की स्थिति, ब्लॉकज की प्रकृति और लंबे समय की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए उद्देश्य केवल ब्लॉकेज खोलना नहीं, बल्कि लंबे समय तक बेहतर और सुरक्षित परिणाम देना होता है। और यही एक अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट की भूमिका है।
अधिकांश बड़े, मुख्य और जटिल ब्लॉकेज में स्टेंट आज भी मानक उपचार
है। लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में DEB अधिक लाभदायक हो सकता है, जैसे:
ऐसी परिस्थितियों में ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी धमनी की प्राकृतिक संरचना को बनाए रखते हुए उपचार प्रदान कर सकती है।

हृदय रोग के उपचार में तकनीक लगातार विकसित हो रही है। ड्रग एल्यूटिंग बैलून एंजियोप्लास्टी (DEB) इस प्रगति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसने बिना स्टेंट के भी उपचार को संभव बनाया है। हालांकि यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन सही चयन और अनुभवी चिकित्सक के मार्गदर्शन में यह एक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक विकल्प बन सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपचार का निर्णय व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर होना चाहिए। सही जांच, सही मूल्यांकन और सही विशेषज्ञ की सलाह ही दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है।